My Blog List indraj raika

सोमवार, 28 अक्टूबर 2013



वो  कुछ पुराने बीते हुए दिन जब इतनी जिमेदारिया नही थि सिर्फ़ सपने थे समाज या गाँव सेवा के कोई स्वार्थ नही था कोमल हदय में जुनून था कुछ अच्छा करू में हौसला बुलंद कर  बढ़ता रहा में अथक परिश्रम करता रहा म खुद के  स्वभाव को गढ़ता रहा में धीरे धीरे वक्त बदलने लगा  पत्थर भी सिककर पिघलने लगा अब सपने सजाने का वक्त नही अतीत के रंग कुछ ओऱ खिलने लगे हे बस युही सोचा आज  कुछ खुद के लिये करके  देखु बस कलम ओऱ कागज लेकर कुछ s शबद गाड़ दीये <<<<इन्द्राज राईका 9772776137 >>>>

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें